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प्राथमिक विद्यालय में जो बच्चों को शिक्षा मिल रही है वह उन छात्रों को आज के इस आधुनिक युग में कितना आगे बढ़ा पा रही है ?
आज के गांव शहर के प्राथमिक विद्यालय में जो बच्चों को शिक्षा मिल रही है वह उन छात्रों को आज के इस आधुनिक युग में कितना आगे बढ़ा पा रही है। इसलिए क्योंकि की भारत में नारा "सब पढ़ें सब बढ़े" का है कतार में खड़े हुए अंतिम विद्यार्थी को उनकी शिक्षा उन्हें कितना आगे बढ़ा पा रही है कितनी ऊंचाईयों तक पहुंचा पा रही है। इस मुख्य बिंदु पर बड़ी गम्भीरता से ध्यान देना अत्याधिक आवश्यक है। धरातल पर शिक्षा की तस्वीर का क्या रूप है। उन विद्यार्थियों के जीवन में उस शिक्षा का क्या योगदान है।जो गरीब परिवारों से निकलकर शिक्षा ग्रहण करने आते हैं। तथा दरिद्र एवं दुर्लभ परिस्थितियों से जूझते एवं संघर्ष करते हुए गांव के पास की पाठशाला में पहुंचते हैं। इसलिए कि जीवन की तंगहाली ने उन्हें जीवन का आभास भी करने से वंचित कर रखा है।यदि शब्दों की सत्यता को ध्यान में रखते हुए ईमानदारी से प्रस्तुत किया जाए तो अब शिक्षा धन पर ही आधारित दिखाई दे रही। जिससे छात्र छात्राओं के सपने को कुचला जा रहा है। जिसकी वजह से आपको अब के वर्तमान स्थिति में गांव के छात्र पढ़ाई को नजरंदाज कर बचपन में ही पैसे कमाने के उपाय खोज रहे हैं। और पढ़ने की इच्छा को मार रहें हैं। जिसकी वजह से भारत की युवा शक्ति नसे- शराब पीना खाना भी अब 15से 20 साल के बच्चे शुरु कर दे रहे हैं । इसपर भारत सरकार को विशेष ध्यान देना चाहिए। और कड़े कदम उठाने चाहिए। और भारत के अंतिम झोपड़ी के बालक अच्छे से पढ़ाई लिखाई कर सकें इसके लिए हर सुविधा उपलब्ध कराना चाहिए। और उनके गरीबी की बेड़ियों को तोड़ना चाहिए। जिससे वो भी भारत और दुनिया में शीर्ष स्थान पर पहुंच सके।.
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